
एक कप चाय...
तुम और मैं...
वहीं वैसे ही...
टिकाए दीवार से पीठ....
कहते सुनते हुए....
अपनी-अपनी बात.....
और सुनते हुए खामोशी....
एक दूसरे की.....
एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने......।
तुम और मैं...
वहीं वैसे ही...
टिकाए दीवार से पीठ....
कहते सुनते हुए....
अपनी-अपनी बात.....
और सुनते हुए खामोशी....
एक दूसरे की.....
एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने......।
अनुजा
ख्वाब सच हो जाए.............काश!!
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