शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

मृत्यु की भी सीनियाॅरिटी होती है....

अंतिम सत्य जीवन का मृत्यु ही है और जब किसी अपने की मृत्यु होती है तो सदैव ही मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर इतना जमावड़ा क्यों जब सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा...! आज यह प्रश्न उतनी तीव्रता से नहीं उठ रहा है मन में हालांकि की मृत्यु की निर्ममता ने फिर एक बार चोट की है....कुछ रजिस्टर नहीं हुआ इस बार...पर कुछ मिसिंग है। ऐसा नहीं कि कोई अनावश्यक, अपरिहार्य व्यक्ति गया है हमारे बीच से, पर फिर भी आज मन उतना विचलित नहीं है कि जी छोड़ के रो सके। न सांत्वना के लिए शब्द हैं और न कुछ कहने का मन...बस, सब चुपचाप सहने का मन है और वही कर रहे हैं....पर दरअसल कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है....न दुक्खम् न सुक्खम्....बस एक ही बात है अभी- एक और गया....घर धीरे धीरे खाली हो रहा है। क्या इसी को परिपक्वता कहते हैं? बस सब कुछ जैसा है वैसा स्वीकार कर लेना.... बिना किसी प्रतिक्रिया के....?

ये वो लोग हैं जिनकी बाहों के दुलार ने हमारे बचपन को आगोश में लिया। ये वो लोग हैं जिनसे घर के व्यास का पता चलता है...ये वो लोग हैं जो कभी दूर नहीं हुए...सदैव उपस्थित रहे हमारे भीतर, अपने प्रेम की उष्मा के साथ...। क्या जाने कौन जी रहा था...हम या वो...पर आंखों में आज भी बचपन, कैशोर्य और युवावस्था के वो सारे दृश्य साकार हैं...आज भी उतने ही जीवन्त....तमाम पारिवारिक मतभेदों बीच भी जो मनभेद कभी नहीं हो सका...उस परंपरा के लोग अब इस संसार से सिमटते जा रहे हैं...अपने अपने ध्रुवों में कै़द पर परिवार के व्यास में फैले हुए...वो सब एक एक कर अब सिमटते ही जा रहे हैं...इतना कि आंसू भी सूख चुके हैं.....सभी सुखांे दुःखों से परे एक सामान्य घटना की तरह उनका जाना स्वीकार कर लिया...यह अप्रत्याशित था हालांकि...पर अप्रत्याशित क्यों....? अगर आपको जानकारी नहीं तो यह तो आपका दोष है.....वर्ना जो पल पल उनके साथ थे उनके लिए स्वीकृत भले ही न हो पर अप्रत्याशित नहीं था....। संसार की भागदौड़ और वाट्स एप और फेसबुक की नज़दीकियों ने भी यह अपडेट नहीं दिया कि स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है...दरअसल यह जानना भी कभी ज़रूरी नहीं लगा कि शरीर कहां कहां साथ छोड़ रहा है......परिवार की एक पीढ़ी में सबसे कम उम्र सदस्य का जाना कभी अपेक्षित नहीं था, अपेक्षित होता भी नहीं..

मृत्यु की भी सीनियाॅरिटी होती है.....लेकिन कभी कभी वह भी दग़ा देती है....कई बार दिया, पर फिर भी हम उस पर विश्वास करते हैं कि शायद इस बार ऐसा न हो। 

अनुजा

05.11.2019


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें