दो दिन भी नहीं.... फिर चल पड़ेंगे सब अपनी राह...
अपना घर... अपने बच्चे...
कभी ज़िक्र आया भी तो यूँ... 'अरे, बड़ी ज़िद्दी थीं.... मनमानी की और मर गईं... कभी बात नहीं मानती थीं... देखा क्या हाल हुआ...
शादी ज़रूर करनी चाहिए...अकेले कोई ज़िन्दगी नहीं काट सकता.... फलां को देखा था... क्या हाल हुआ था... जो किताबों में लिखा है.. गलत थोड़े है... जो नियम बनाए गए हैं... इसीलिए.. वगैरा वगैरा... '
लड़की अविवाहित हो, तलाकशुदा हो या पतिविहीन हो... इनमें से किसी भी सि्थति में वह मुख्यधारा से अलग हो जाती है....'सुनिए, घर वापस लौटी लड़की की इज्ज़त नहीं होती...' मेरी एक मित्र ने कहा एक दिन...कोई लड़की का स्वामी दिवंगत हो गया... अपने बच्चे के साथ रहकर लौटी... साथ कोई नहीं था... सब ख़ुद ही करना था... किया.. नौकरी की.. बच्चे को बड़ा किया... संयोग से ऐसे अनेक लोग मिले मुझे जीवन में...जो इस तरह के संघर्षों में ज़िंदगी को समझने की कोशिश कर रहे थे... और प्रतिक्रिया और परिणाम एक जैसे ही दिखाई पड़ रहे थे....!
और सबके बारे में एक ही जैसी बात हो रही थी.. गॉसिप में... थोड़ी बहुत फेर बदल के साथ..
देखो, उसने छोड़ दिया...क्या मिला... क्या इज़्ज़त रही... घर में कौन पूछता है...
अपने आप को सँभालना चाहिए... कौन कब तक करेगा...., जिसके पति दिवंगत हो गए....
फलाँ का चाल चलन नहीं अच्छा... पीकर लौटती है...
पता है, ये कौन लोग हैं... जो किसी मुश्किल में इन औरतों के साथ नहीं खड़े हुए..
कुछ बोझ मानते हुए थोड़ी बहुत मदद कर गए..
मगर किसी ने सहर्ष नहीं स्वीकारा...
किसी ने उन औरतों की हिम्मत और संघर्ष पर बात नहीं की..
पता है... इस सारी गॉसिप से एक भय का संचार किया जाता है मनों में... कभी भी वास्तविक प्रश्नों पर बात नहीं होगी.....
वास्तव में वो ख़तरनाक प्रश्न हैं... उन पर बात करना आसान नहीं है...
और इस तरह निर्णय लेने का हक़ बच्चों... खासकर लड़कियों से छीन लिया जाएगा.... अभी भी कहाँ दिया जाता है.. ? कभी जीवन के लिए तैयार नहीं किया जाता....!
अब तस्वीर उलट दीजिए....इन औरत की जगह आदम को रख दीजिए... फिर गॉसिप देखिए-
अरे उसने शादी नहीं की... भाई/ बहन को बच्चों के लिए करता... अरे बीवी नहीं है... शादी कर लेते या हो जाती तो बेहतर होता.....बीवी के बाद बच्चों को खुद पाल रहे हैं... माँ साथ रहती हैं.....
याँ कोई मनमानी की बात नहीं करता... सेक्रिफाइज़ का बात होती है.... ये फर्क है...
मनमानी हो या मजबूरी... जीवन में सबको एक चश्मे से नहीं देखा जाता.... मगर मनमानी कर जीवन की राह अपनी चुनने वालों को खासा कोसा जाता है.. खासकर लड़कियों को..
ऐसे... जैसे जिन्होंने मनमानी नहीं की... वो परेशान नहीं हुए..सदा अमर रहे....
(ऐसे ही... चलते-चलते...)
अनुजा